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बिहार में सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक, मेडिकल कॉलेज होंगे PPP मोड पर
- Reporter 12
- 30 Mar, 2026
बिहार में स्वास्थ्य सुधार के लिए सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक लगाने की योजना, मेडिकल कॉलेजों को PPP मोड पर लाने की तैयारी। जानें पूरी रणनीति और इंसेंटिव योजना।
पटना: बिहार सरकार ने स्वास्थ्य सेवा की गुणवत्ता और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए बड़ा कदम उठाने की तैयारी शुरू कर दी है। उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने हाल ही में ‘आरोग्य एक्सीलेंस अवार्ड्स 2026’ के मंच से संकेत दिए कि सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों में तैनात डॉक्टर अब अपनी निजी प्रैक्टिस नहीं कर पाएंगे।
सरकार का उद्देश्य सरकारी अस्पतालों में फैकल्टी की कमी दूर करना और मरीजों को बेहतर सुविधा प्रदान करना है। इसके साथ ही, बिहार के मेडिकल कॉलेजों को PPP (सार्वजनिक-निजी भागीदारी) मोड पर लाने की योजना भी तेज़ी से आगे बढ़ रही है।
निजी प्रैक्टिस बंद, मिलेगा विशेष इंसेंटिव
इस कदम के तहत सरकारी डॉक्टरों को निजी क्लीनिक बंद करने के बदले ‘नॉन-प्रैक्टिस अलाउंस’ और विशेष इंसेंटिव दिया जाएगा। उप मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकार डॉक्टरों के संघ के साथ बैठकर बीच का रास्ता निकालेगी ताकि उनकी आर्थिक हानि की भरपाई की जा सके।
सम्राट चौधरी ने यह भी स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने निजी प्रैक्टिस पर रोक का प्रस्ताव तैयार किया है और इसे अगली कैबिनेट बैठक में मंजूरी के लिए पेश किया जाएगा।
सरकारी मेडिकल कॉलेजों की स्थिति
उपमुख्यमंत्री ने मदेपुरा और बेतिया जैसे सरकारी मेडिकल कॉलेजों का जिक्र करते हुए कहा कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद फैकल्टी की कमी अभी भी बनी हुई है। वहीं, कटिहार और सासाराम जैसे निजी मेडिकल कॉलेज बेहतर ढंग से चल रहे हैं।
सम्राट चौधरी ने चिकित्सकों से अपील की कि वे सरकारी मेडिकल कॉलेजों के सुधार में योगदान दें, ताकि मरीजों को बेहतर सेवाएं मिल सकें और राज्य से विशेषज्ञों का पलायन रुके।
PPP मोड में आएंगे मेडिकल कॉलेज
राज्य सरकार ने निर्णय लिया है कि बिहार के मेडिकल कॉलेजों के संचालन और प्रबंधन में PPP मोड लाया जाएगा। इसका उद्देश्य संसाधनों का बेहतर उपयोग और संचालन की दक्षता बढ़ाना है।
सरकार प्रति कॉलेज लगभग 500 करोड़ रुपये खर्च कर रही है, लेकिन आउटपुट कम होने के कारण अब प्रबंधन जिम्मेदारी निजी संस्थानों या विशेषज्ञ समूहों को सौंपने पर विचार किया जा रहा है।
इस पहल से उम्मीद जताई जा रही है कि सरकारी कॉलेजों में सुपर-स्पेशलिस्ट और अनुभवी डॉक्टरों की संख्या बढ़ेगी और आम जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी।
बड़े डॉक्टरों और संस्थानों से सहयोग की अपील
सम्राट चौधरी ने बड़े चिकित्सकों और मेडिकल ग्रुप्स से अपील की कि वे बिहार में स्वास्थ्य सेवा के सुधार में सरकार का सहयोग करें। उन्होंने कहा, “पटना आप ही के दम पर चल रहा है, अब समय है कि आप सरकारी मेडिकल कॉलेजों को अपनापन दिखाएं।”
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर बड़े मेडिकल ग्रुप राज्य में अस्पताल खोलना चाहते हैं, तो उनके लिए सिंगल विंडो सुविधा शुरू की जाएगी। इससे नए प्रोजेक्ट्स की प्रक्रिया सरल और तेज होगी।
मरीजों को मिलेगा फायदा
इन बदलावों से मरीजों को कई लाभ मिलेंगे:
सरकारी अस्पतालों और कॉलेजों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ेगी।
निजी प्रैक्टिस पर रोक से डॉक्टर पूरी तरह सरकारी सेवा पर ध्यान देंगे।
PPP मोड में बेहतर प्रबंधन और संसाधनों का सही उपयोग सुनिश्चित होगा।
राज्य से बाहर उपचार के लिए जाने वाले मरीजों की संख्या घटेगी।
निष्कर्ष
बिहार सरकार की यह पहल स्वास्थ्य सेवा में सुधार और पारदर्शिता लाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकारी डॉक्टरों की प्राइवेट प्रैक्टिस पर रोक और मेडिकल कॉलेजों का PPP मोड में प्रबंधन, दोनों ही कदम राज्य में स्वास्थ्य तंत्र को मजबूत और मरीजों के लिए सुविधाजनक बनाने की दिशा में हैं।
इस नीति के लागू होने से बिहार के सरकारी अस्पतालों और मेडिकल कॉलेजों का प्रदर्शन सुधरेगा और आम जनता को बेहतर और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी।
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